Thursday, 24 September 2015

घणी जूनी बात हैं

अैक घणी जूनी बात हैं ।जद टाबरां री भणाई पढाई गुरु जी रे आश्रम में विया करती, गुरूजी टाबरां ने आप रे अनुभव सूं अर आप रै तपोबळ सूं आवण वाळै जीवन रे वास्ते त्यार करता ।  जद मानखे रे जीवन रो धै मिनख पणा ने किकर निभाय सके अर जगत री सेवा कितरी बण सके अैडो़ हो ।इण भांत एक गांव रा च्यार टाबर गुरूजी रे आश्रम पूगा ।घणा बरसां तांइ तगड़ी मैनत अर करडी़ लगन सूं तीन मोट्यार तो जबरा त्यार व्हैगा, पण चौथोडो़ ठीका ठीक रह्यो ।जद वारी दीक्षा पूरी व्हैगाी, गुरूजी वां सगळा ने घरे जावण री इजाजत दींनी । ज्यां दिन आवण जावण सांरू पगां रो बळ इज काम आवतो ।च्यारू मोट्यार एक घणे जाडे जंगळ सूं  निकळ रह्या हा  के व्है अैक जगा हाडका बिखरियोडा़ देख्या, जद व्है बि़चार करियो के, अै हाडका किसा जिनावर रा व्है सकै ?       सगळा आप आप रो बि़चार राख्यो पण किणी नतीजा माथै नी पूग सक्या ।जद व्है विचार करियो के इण जगै गुरूजी रो ग्यान परखणो चाहिजै । जद आ बात खरी व्हैगाी, तद अैक जणौ बोल्यो  के म्हारें मंतरो रे जोर सूं  अां बिखरियोडा़ हाडकां रो म्है अैक टंटेर (कंकाळ) बणाय सकूं । अर व्हो आंखियां  मीच मंतर पडण लागो, थोडी़ क बखत बीती अर विणरै आंखियां खोलते पाण सगळा हाडका भैळा व्हैगा, अर एक नव हत्थे सींघ रो कंकाळ ब़णगो ।अैड़ै मोके दूजोडो गम किकर खाय सके, व्हो अणूतो उतावळो व्है बोल्यो के म्हारे मंतरा रो जोर थारे व्हाळा सूं घणो जबरो हैं । म्है इण टंटेर में मांस, लोही (खून) अर खालडी़ घाल सकूं । व्हो किणी रै पडू़तर री बाट कोनी जोयी, जट पलको जुकाय अर मंतरा रा जाप सरू करिया ।थोडी़ जैज में विण कंकाळ में अैडो़ सरूप कर दिनो जाणे केहरी भर नीद सूतो हैं ।अबे विण तिजोडे मोट्यार रे डील में तो जाणे लाय लागगी , व्हो जद तक आप रे मंतरो रो जोर नी दिखावै तद तांइ विणनै किकर चैन पड़ै ।व्हो अणूतो उतावळो व्है आप रो काम सरू करण वाळो इज हो जितरै सबसूं कम कूंत राखणियो चौथोडो़ बोल्यो, भाइ इण जीव घालणो जरूरी हैं  कांइ  ओ तो देखो ओ सींघ हैं, ओ जीवतो वियो तो विणाश करसी, ।पण विण री कुण सुणै, तिजोडो मोट्यार बोल्यो थूं जाणे तो कीं हैं कोनी, असल ठोठ ।जद इण में म्है जीव नी घालूं तो पछै म्है यां दोनां सूं कमतर कैवीजू, ।जद के म्हारै कनै इणां सूं सवाइ कळा हैं ।चौथोडो़ मोट्यार बोल्यो ठीक हैं भाइडा़ म्हने अठा सूं जाण दै, पछै थ्हांरे चोखो लागै ज्यूं करजो  इतरो कैवणो चावूं के थांरी आ कळा थांरो खळौ कर दैसी ।पण घणो ग्यानी किणरी सुणै । व्है तो ग्यान में गैला वियोडां व्है ।वो तिजोडो मोट्यार कोनी मान्यो अर आप रा सजीवण मंतरा सूं सींघ ने सरजीवत कर दिनो ।आगलो काम तो पछै सिंघ ने ही करणो हो ।अठै अैक बात रो खुलासो करणो चावूं के, आज रा विग्यानी जिण तरै प्रथ्वी तत्व ने निचोड इण मांय सूं अकूत उर्जा निकाळै विणी ज भांत आपणै बडेरो में वायु तत्व रो मंतरा सूं मथ ने अकूत उर्जा निकाळण रो बक हो ।पण मूळ बात इण में जका कैवणी चावूं वा आ हैं के विण च्यारू दोस्तों में पढियो लिखियो कुण हो...। इण माथै विचार करावाड़ो , ।दूजी बात हैं के इण में जको दीठ रो फरक निजर आवै विणनै आंपां दोय टुकडा़ में कर दैखां (१)पैली दीठ विण तीन जणा री है जिण रो सार हैं, कोइ काम वै सकै या कोनी वै सकै इण ने आप विग्यानिक दीठ कैय सको ।(२)दूजी दीठ चौथोडा़ मोट्यार री ही  के कोइ काम वैणो चाहिजै कै नी वैणो चाहिजै इण ने आप नीति री दीठ या दार्शनिक दीठ कैय सको  । मिनखा जूण में कुण सी दीठ कितरी मेहताउ हैं, इण माथै बि़चार करावाड़ो  ।बाकी री बात काले करांला   भगवान सिंह खारी

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