Wednesday, 16 September 2015

दीदी चल दीस तीजा

दीदी चल दीस तीजा
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मरना होगे भांटो के , दीदी चल दीस तीजा
चार दिन ल कइसे पहाय, निकलत वोकर बीजा
नोनी बाबू सबो चल दीस, सुन्ना सुन्ना लागत हे
मोबाइल ल कोचकत हाबे, रात रात भर जागत हे
साग पान मिठात नइहे, रांधे ल नइ आवत हे
जरहा भुंजहा रांध के, अलवा जलवा खावत हे
जल्दी आबे मईके ले, फोन ल लगावत हे
दू दिन अऊ रुकहूं, दीदी ह चिल्लावत हे
काबर आथे तीजा पोरा, भांटो ह झल्लावत हे
कतको झन तो सुन्ना पाके, बोतल ल हलावत हे ।।
मरना होगे भांटो के, दीदी चल दीस तीजा
चार दिन ल कइसे पहाय, निकलत वोकर बीजा ।।

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