सोमवार, 31 अगस्त 2015

सांडसी

एक गाँव में 10, साल
का लड़का अपनी माँ के साथ
रहता था।

माँ ने सोचा कल मेरा बेटा मेले में
जाएगा,
उसके पास
10 रुपए तो हो,
ये सोचकर माँ ने खेतो में काम
करके शाम तक पैसे ले
आई।

बेटा स्कूल से आकर
बोला खाना खाकर
जल्दी सो जाता हूँ, कल मेले में
जाना है।

सुबह माँ से बोला -
मैं नहाने
जाता हूँ,नाश्ता तैयार
रखना,
माँ ने रोटी बनाई,
दूध
अभी चूल्हे पर था..!

माँ ने देखा बरतन पकडने के लिए
कुछ नहीं है,
उसने गर्म पतीला हाथ से
उठा लिया,
माँ का हाथ जल
गया।

बेटे ने गर्दन झुकाकर दूध
रोटी खाई और मेले में
चला गया।

शाम को घर आया,तो माँ ने
पूछा - मेले में क्या देखा,10
रुपए
का कुछ खाया कि नहीं..!!

बेटा बोला -
माँ आँखें बंद कर,तेरे लिए कुछ
लाया हूँ।

माँ ने आँखें बंद की,तो बेटे ने उसके
हाथ में गर्म बरतन
उठाने
के
लिए लाई सांडसी रख दी।

अब
माँ तेरे हाथ
नहीं जलेंगे।

माँ की आँखों से आँसू बहने लगे।

दोस्तों,
माँ के चरणों मे स्वर्ग है,
कभी उसे दुखी मत करो..!

सब कुछ मिल जाता है,
पर माँ दुबारा नहीं मिलती।

मेरी माँ
मां से प्यार करते हो तो आगे
शेयर जरुर करना.

डिंगल भाषा विशुद्ध राजस्थानी गद्य

डिंगल भाषा विशुद्ध राजस्थानी गद्य उदाहरण
मणिहारी जा री सखी, अब न हवेली आव।
पीव मुवा घर आविया,  विधवा कवण बणाव।।
कुंडलिया छंद
धरा सदा नर वेधनी
चाळा नित चाहंत
भिड़े कटावै भाइयां
वळ पितु पूत विढंत
वळ पितु पूत विढंत
पियारी राज कज
कीधौ गोत कदन्न
अरजन चाप सज
आगे दांणव देव
किता ही आहुड़े
ले परव्रम अवतार
धरा कारण लड़े 
केवल चारण कवियों की भाषा
पिंगल ब्रज मिश्रित राजस्थानी ब्राह्मण, राव भाटों की भाषा
उदाहरण
जननी जने तो जन भदोरे जवार जिसा
नहीं तो बावरी तेरी कुख को बंधाय ले
एक रैन सुनी पीव आवन की
इक सुंदर नार सिंगार सजायो
पीळो ही केसर पीळो ही वेसर
पीळो ही हार हीये लिपटायो
पीव की खातिर पीळी भई
पर सांझ भयी पर पीव न आयो

आर.टी.ई. के अनुसार  राजस्थान में प्राथमिक  शिक्षा मातृभाषा राजस्थानी में दी जाए

प्रतिष्ठा में
शिक्षा मंत्री
राजस्थान सरकार
जयपुऱ
विषय :   आर.टी.ई. के अनुसार  राजस्थान में प्राथमिक  शिक्षा मातृभाषा राजस्थानी में दी जाए
महोदय ,
उपर्युक्त विषयान्तर्गत निवेदन है कि राजस्थान में  नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009 लागू हो चुका है मगर  आज भी राजस्थान में इस अधिनियम के प्राण तत्व की अनदेखी हो रही है । इस विधेयक का ही नहीं अपितु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या-2005 का प्राण तत्व है 6  से 14 वर्ष के बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध करवाना । राजस्थान देश का एक मात्र ऐसा बडा़ राज्य है जिसके 6 से 14 वर्ष के बच्चे अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हैं । इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी  भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है । यदि  राजस्थानी  भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है  तो इस में बच्चों का क्या दोष है ? यह काम तो  देश की सरकार को करना था , राजस्थान के 6 से 14 वर्ष के बच्चों को नहीं । कितना  अज़ीब लगता  है कि देश के सब से बडे़ राज्य के करोडों लौग एवम उनके बच्चे अपनी मातृभाषा की मान्यता के लिए  1950 से तड़प रहे हैं । भारत की  जनगणना 2011में भी राजस्थान के 4 करोड़ 83 लाख लोगों ने अपनी मातृभाषा राजस्थानी दर्ज करवाई है। देश के अन्य राज्यों एवम विदेशों में भी राजस्थानी भाषियों की संख्या कम नहीं है। राजस्थान की विधान सभा ने भी 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल  करने के लिए  एक सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजा हुआ भी है जो विगत 11 वर्षों से वहां लम्बित है । साफ़ है कि सरकार की कमी का ठीकरा बच्चों के सिर पर फ़ोडा़ जा रहा है ।नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009 की धारा 29 की उपधारा 2 का [च ] बहुत साफ़-साफ़ कहता है कि-" शिक्षा का माध्यमजहां तक हो सके बचों की मातृभाषा के अनुरूप हो/ होगा !" इसी विधेयक की धारा 24  की उपधारा 1 का [ ख ] बहुत साफ़-साफ़ कहता है कि- "  धारा 29 की उपधारा 2 का [च ] के उपबंधों के अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित करना और उसे पूरा करना । " राजस्थान के संदर्भ में इन धाराओं के प्रकाश में  सवाल  उठते जिनका समाधान राज्य सरकार को ही करना है । सवाल है कि- 1-क्या राज्य के बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षण प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है ।------ [अभी तक तो नहीं] । बचों को प्राथमिक शिक्षा उसकी मातृ भाषा में मिले इस हेतु उस भाषा का संविधान की  आठवीं अनुसूची में होना कत्तई जरूरी नहीं है-यह राज्य सरकार की मंशा  पर ही निर्भर करता है कि राज्य अपने बच्चों को किस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देना चाहता है । संविधान भी  राज्य सरकार  इसकी छूट देता है और ऐसा कई राज्यों में हो भी रहा है । 2- पूर्वी राज्यों में एक से अधिक मातृभाषाओं में प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है जो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है । ऐसा राजस्थान में भी किया जा सकता है यहां राजस्थानी भाषा के साथ-साथ उसकी बोलियां वागडी़, हाडौ़ती, मेवाती, ढुंढाडी़ , मारवाडी़, शेखावाटी, ब्रज  आदि में पाठ्यक्रम तैयार करवा कर शिक्षण करवाया जा सकता है । 3- क्या राज्य में नि:शुल्क एवम अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार विधेयक-2009   की धारा 29 की उपधारा 2 का [च]  व धारा 24  की उपधारा 1 का अक्षरस: पालन करने वाले शिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं ? ---[अभी तक तो नहीं ]  तो फ़िर राज्य में शिक्षक नियुक्ति हेतु जो टैट परीक्षा करवाई जा रही है उसका क्या औचित्य है ? यह टैट परीक्षा तुरन्त बन्द होनी चाहिए तथा राज्य के बच्चों के लिए सर्वथा उपयोगी शिक्षक नियुक्त होने चाहिए ।
कितनी बडी़ विडम्बना है कि राजस्थान का बच्चा अपनी मातृभाषा को छोड़ कर अन्य तमिल , तैलगु , मराठी,गुजराती ,बंगाली,मलयालम आदि 22 राजभाषाओं को अपनी शिक्षा का आधार बना सकता है ।
भारत के संविधान में अनुच्छेद 19 [1] भारत के नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है । जब राजस्थान के नागरिकों की भाषा को ही मान्यता नहीं है तो वे अभिव्यक्त भला कैसे होंगे ? इसी तरह संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक में भारतीय भाषाओं को संरक्षण देने की पैरवी की गई है । ये अनुच्छेद भारत की बडी़ से बडी़ व छोटी से छोटी यहां तक कि भाषायी अल्पसंख्यकों और छोटे-छोटे तबकों की कम से कम बोली जाने वाली भाषाओं  के संरक्षण की गारंटी देते हैं । भारत के संविधान में एक आठवीं अनुसूची भी है जिस में 14 सितम्बर 1949 से 15 अगस्त 1950 तक 14 भाषाएं शामिल की गई । बाद में राज्य सरकारों की मांग पर  अब तक 8 और भाषाएं शामिल की गई । वर्तमान में इस सूची में 22 भाषाएं शामिल हैं । बडा अफ़सोस है कि राजस्थान की जनता की लगातार मांग एव राजस्थान की विधान सभा द्वारा लिए गए सर्वसम्मत संकल्प प्रस्ताव तक की लगातार अनदेखी हो रही है । भारत की कोई राष्ट्र भाषा नहीं है मगर हिन्दी सहित 22 राज भाषाएं हैं । किसी भी प्रदेश में किसी भी भाषा को राज भाषा अथवा दूसरी राज भाषा बनाने का निर्णय भी राज्य की विधान सभा ही ले सकती है । संविधान का अनुच्छेद 345 किसी भी राज्य की  विधान सभा को यह अधिकार देता है कि वह अपने राज्य में बोली जाने वाली भाषाओं में से किसी एक को या अधिक भाषाओं को अथवा हिन्दी को एक से अधिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उपयोग में ले सकती है । इसी क्रम में संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार का उपयोग करते हुए राजस्थान की विधान सभा प्रस्ताव पास कर  राजस्थानी भाषा को राजस्थान की द्वितीय राज भाषा घोषित कर सकती है । यह कदम उठाने के लिए राजस्थानी भाषा का संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होना भी जरूरी  नहीं है  । करोडों बच्चों के अपनी मातृअभाषा में शिक्षा लेने के अधिकार की रक्षा हेतु राज्य सरकार को यह कदम उठाना ही चाहिए !
      भवदीय
डाँ.राजेन्द्र बारहठ
प्रदेश पाटवी,अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति,राजस्थान

आजादी रे सागै ही राजस्थान री जनता रे साथे एक मोटो धोखो हुयो 

आजादी रे सागै ही राजस्थान री जनता रे साथे एक मोटो धोखो हुयो  वो ओ हे क विणरी मायड़ भाषा मूंडे सूं खोस लीनी जिण रो ओ असर वियो  क जिण प्रदेशों में आपरी मायङ  भाषा में पढ़णीया टाबर हा वै राजस्थान रा टाबरां सूं भारत सरकार री नोकरियों खास कर मोटी नोकरियों में घणा आया (बंगाली  तमिल  अर दूजी दिखणाद री भाषाओं इण में गिणीज सके) राजस्थान री नोकरियों अर जगत पोशाळाओं में घणकरा लोग उतराद रे प्रदेशों सूं आया जको जाण बूझ र राजस्थानी भाषा ने लारै राखण रा जतन करिया इण लोगों रो फायदो राजस्थानी भाषा ने लारै राखण में ही हो इण खातर व्है एड़ीज पक्की व्यवस्था बणाय दीनी  के अटारा टाबर कांइ पढेला वा ए तै करला  स्कूलो में किताबो कैड़ी व्हैला वा ए तै करेला इण कारण सूं आंपां लोग आंपणी जड़ा सूं कटता गया अर नवी पिढी रा टाबर आपरी मायङ भाषा री मटोट गवांय दीनी जूना संस्कारां सूं अळगा व्हैगा  इणीज कारण आज मायङ भाषा मान्यता री खातर इणो रे हिये में हिलौळ नी उठे  छाती में जोश रोधपळको नी उठे    स्कूलो में आपणे साथे किया ए लोग छळ करे इण री बानगी दैखो  पैली पोत पोशाळा मे आवणियो टाबर आपरै घरे एक मिनकी ने देख उण रो नाम आपरी मायङ भाषा में मां या दादी सूं सीख र पोशाळ में आवे अबे विने हिन्दी रा गुरूजी कैवे आ मिनकी  कोनी बिल्ली हैं  टाबर गतागम पड़ जावै पण इतरा सूं विणरौ छूटकारो कठै  अगरेजी रा सर आय ने केवे आ बिल्ली कोनी आ कैट हैं टाबर रे हिये में हाल ताइ चितराम पका व्हैणा हैं जिते तो घरवाळा री भाषा अर पोशाळ री भाषा टाबर ने डाफाचूक करदे  पण असली घात इण रे साथे आंपणी सरकार करे जद ओ टाबर एडा़ घणकरा शबद सीख जावै अबे परीक्शा री वेळा सगळा टाबरां सूं दस जिनावरों रा नाम पूछिजै जिण टाबर रे घरां अगरेजी बोलिजे वो ६ शबद सही बताय दै अर म्हारै वा ळौ टाबर ३ सही बतावै अबे म्हने अर म्हारै टाबर ने घर रा  समाज रा अर आंपणी सरकार ठोठ कैवे  गुरूजी ने नाजोगा कैवे पण इण ना जोगी व्यवस्था ने कोई नी कैवे में परीक्शा लीनी टाबर ने कितरा शबद याद विया जिण घर में अगरेजी बोले विण टाबर रे खजाने में ६ शबद विया अर म्हारै टाबर रै खजाने में ९ शबद विया कारण के वो एक री ठोड़ तीन तीन शबद याद करिया    मिनकी =बिल्ली =कैट     उन्दरो =चूहा=रैट3*3=9 इण भांत. राजस्थानी भाषा ने मान्यता नी दैय आपाने ना जोगा बणाया राखे   

शनिवार, 29 अगस्त 2015

रक्षाबंधन पर महूरत धेखने की जरुरत नहीं

दोस्तों आप राखी वाले दिन किसी भी समय राखी बधवा सकते हैं , इसमें आप को कोई मुहूरत या राखी का कलर देखने की कोई जरुरत नहीं। राखी बाधना या बधवाना एक प्रथा है कोई पूजा नहीं जो इतनी चीजे ध्यान रखने की जरुरत है , त्यौहार को enjoy कीजिये और इस त्यौहार का जो मुख्य बिंदु है भाई-बहन का प्रेम , इसको मजबूत कीजिये। और दिन भर किसी भी समय राखी बंधवाई जा सकती है
.
.
आजकल बहुत से लोग  लोग फेसबुक और टीवी पर आकर बताने लगे हैं  की ये समय भद्रा है , इसमें राखी न बाधे या मेष राशि वालो के लिए ये समय है और मेष राशि वाले लाल रंग की राखी बधवाए या ये करे वो न करे। तो दोस्तों राखी में बहन का प्रेम देखने की जरुरत है राखी का कलर , अपनी राशि या समय नहीं।
.

.
ज्योतिष तो यही कहता हैं की राशि के आधार पे बिना कुंडली दिखाए कोई भी रत्न या कोई भी कलर या नंबर को लकी नहीं मानना चाहिए।
वैसे रावण के काल में रक्षा बंधन नही था। कोई सिद्ध करने वाला हो

भद्रा काल में रक्षा बंधन करने में कोई दोष होता हैं कृपया इस MESSAGE  से  लोगो में भ्रम न पैदा करे। हर पूर्णिमा को भद्रा पड़ेगी ही। और मुख्यतः रक्षा बंधन के दिन तो हर साल भद्रा होता है।
.
.
एंड सबसे बड़ी बात ज्योतिष शास्त्र की की ............ भद्रा का दोष तभी माना जाता है ,जब भद्रा का निवास पृथ्वी लोक में हों ............ अर्थात् उस दिन विष्टि करण हो तो भद्रा होती है और उसी दिन विष्टि करण के साथ-साथ चन्द्रमा कर्क,सिंह,कुम्भ,मीन इन चार में से किसी एक राशि में हो।
अतः रक्षा बंधन के दिन by defult कभी भी ऐसा नही हो सकता। क्योंकि उस दिन हर साल श्रवण नक्षत्र ही पड़ेगा।जो,कि आपको पता ही होगा कि, मकर राशी में श्रवण नक्षत्र होता है। इसलिए हर साल रक्षाबंधन वाले दिन चन्द्र मकर में होगा। तो भद्रा का निवास पृथ्वी लोक में न होने से यह दिन भद्र के दोष से मुक्त है।

कुं कु चावल थाल सजायो

कुं कु चावल थाल सजायो, हाथां लीवी राखड़ी,
मेड़ी चढ़ चढ़ जोवे बीरा, बहना थारी बाटड़ी,
मन में मुलके मृगनयनी, जामण जाओ घर आवेला,
माँ बापू रा समाचार सुण, हियो म्हारो भर जावेला,
दौडूला झट रोटोड़ी, बीरा रे गले मिल जाऊंला,
नैणां में छलकेला आंसू, बीरा सूं पूछवाउला,
दीप जला मैं करू आरती, कुं कु तिलक लगाउला,
मुंडे में मंगलेश देयने, चावल तिलक चढ़ाउला,
हंसती रोती साँचा मन सु,बांधुला में राखड़ी,
मेड़ी चढ़ चढ़ जोवे बीरा, बहना थारी बाटड़ी।

हैपी राखी...

शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

मायङ भाषा

मायङ भाषा मान्यता री, आज लिरावो आखङी ।
साचो नेग दे सवासणियों ने, राज बन्धाजों राखङी ।।