Friday, 23 October 2015

धरी बाबा के कान के नीचे

जाट ने खेत में टयूबवेल लगवाना था !
सोचा कि बाबा जी से पूछ लू कि पानी कहां
होगा !
बाबा जी ने सारे खेत में घूम कर एक कोने में हाथ रख
दिया
और बोला कि यहां टयूबवेल लगा ले और 1100 रु. ले लिये !
जाट बेचारा भुरभुरे स्वभाव का था !
बाबा जी से बोला:-
मैं बहुत खुश हूं...
आप मेरे घर खाना खाने आओ !
बाबा ने सोचा कि फंस गई सामी आज तो... और हां कर
दी !
जाट घर जा कर जाटणी से बोला,:-"
बाबा जी जिम्मण आवेंगे पकवान बना ले और
एक कटोरी में नीचे देसी
घी और उपर बूरा घाल दिये !
जाटणी बोली कि घी तो उपर
होता है.
जाट बोला कि आज तू घी नीचे रखिये !
बाबा जी आ गये और बूरे वाली
कटोरी देख कर बोले ,:-
" जाट भाई इसमें घी तो है ही
नहीं !
जाट ने चप्पल निकाल के एक धरी बाबा के कान के
नीचे और बोला,:-
" तन्नै खेत में 250 फुट नीचे का पानी
देख लिया...
कटोरी में 2 इंच नीचे घी
नी दिक्खया

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