Sunday, 11 October 2015

कागां धवल़ धारिया चोल़ा

कागां धवल़ धारिया चोल़ा
हंसां रा खिंडग्या छै टोल़ा
मठ मंदर मे बुगला बैठा
ज्यांरा चरण चांप र्या भोल़ा
राज तिकड़मी तोतक रासो
लखिया सो भर र्या छै झोल़ा
सिंद्धातां रो कीं नीं बटणो
कहग्या लोग गजब रा गोल़ा
मीठै ऊपर भणकै माख्यां
ढूंढी उपर गि़डक दोल़ा
तोतक रासो साव तमासो
गूंगा गावै सुण र्या बोल़ा
सुणै नही को ग्यान गरीबी
करग्यो दास कबीरो रोल़ा

श्रीमान गिरधारी दान जी द्वारा रचित. 

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